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विभिन्न रंगों के हेलमेट का मतलब! (Helmet color for construction in india)

जानिये, अलग-अलग रंग के हेलमेट का क्या अर्थ है? (Helmet colour code)

सेफ्टी हेलमेट क्या हैं?

पारंपरिक हेलमेट के विपरीत, सेफ्टी-हेलमेट उपयोगकर्ता को घातक सिर की चोटों से बचाने के लिए होते हैं। इंडस्ट्रियल सेफ्टी हेलमेट पहनने वाले को 'गिरने वाली वस्तुओं' से बचाने के लिए डिज़ाइन किए गए होते हैं। यह मस्तिष्क को चोटों या खोपड़ी के फ्रैक्चर से बचाता है।

औद्योगिक संयंत्र और कंस्ट्रक्शन साइट पे आमतौर पर दुर्घटना या चोट की संभावना अधिक रहती हैं। इसलिए वहां कार्यरत सभी को सेफ्टी हेलमेट पहनना 'अनिवार्य' होता है। हेलमेट कई रंगों वाले होते हैं, लेकिन हरेक कलर का विशिष्ट मतलब होता हैं जो उपयोगकर्ता द्वारा किये जाने वाले कार्य या जिम्मेदारी पर आधारित होते हैं।


सेफ्टी हेलमेट के लिए स्वीकृत रंग हैं (Helmet color for construction in India):

सफेद हेलमेट - सफेद अन्य रंगों के समूह में आसानी से देखे जा सकतें है। इसलिए, उजला हेलमेट सुपरविज़न या प्रबंधन कार्य हेतु आर्किटेक्ट्स, इंजीनियरों और पर्यवेक्षकों के द्वारा इस्तेमाल किये जाते हैं।

helmet color for construction in india


पीले रंग का हेलमेट - इस रंग का हेलमेट श्रमिक (Labour) पहनते है। अनेक प्रकार के लेबर, जैसे- सामान्य निर्माण कार्य करने वाले कर्मी, भारी मशीनरी का संचालन करनेवाले ऑपरेटर, हैवी-ड्यूटी कार्य करनेवाले लेबर भी पिला एंग का हेलमेट उपयोग करतें हैं।

ग्रे रंग का हेलमेट - यह अक्सर कार्यस्थल (Construction Site) पर आगंतुकों (Visitors) के सुरक्षा के लिए उनको दिया जाता है। 

लाल हेलमेट - इसका उपयोग अग्निशामकों (Fire Fighters) या आपातकालीन से सम्बंधित कर्मचारियों द्वारा किया जाता है।

भूरे रंग का हेलमेट - इसका उन श्रमिकों द्वारा उपयोग किया जाता है जो किसी भी प्रकार की वेल्डिंग या उच्च गर्मी वाली स्तिथि का काम करते हैं।

नीला हेलमेट - इलेक्ट्रीशियन और बढ़ई आमतौर पर ब्लू हेलमेट इस्तेमाल करते हैं। अन्य तकनीशियन भी नीले रंग का हेलमेट पहन सकते हैं।

हरा हेलमेट - यह आमतौर पर कंस्ट्रक्शन साइट के सेफ्टी ऑफिसर्स/इंजिनियर द्वारा उपयोग किया जाता है।

पिंक हेलमेट - यह कलर महिला वर्कर इस्तेमाल किया करती है।

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रंग के अनुसार हेलमेट का उपयोग करने के लाभ:

कार्यस्थल पर सभी कर्मचारियों द्वारा एक ही रंग का हेलमेट इस्तेमाल करने पर भ्रम की स्तिथि पैदा हो सकती है। काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान करने में दिक्कत हो सकती है। यह साबित हो चुका है कि सेफ्टी हेलमेट के लिए कलर कोडिंग सिस्टम ने काम करने की प्रक्रिया को सुचारू और तेज बना दिया है।

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