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सिविल इंजीनियरिंग में क्या काम करना होता है | Civil engineer work details in hindi

एक सिविल इंजीनियर क्या काम करता हैं? - भूमिका और जिम्मेदारियां


Civil engineer जिसे हिंदी में 'असैनिक अभियंता' के नाम से जाना जाता है, की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां प्रोजेक्ट में निर्माण कार्यों की प्रकृति पर निर्भर करती हैं। इसमें गुणवत्ता नियंत्रण (Quality control), डिजाइनिंग, प्लानिंग, एस्टीमेट और रिपोर्टिंग जैसी विभिन्न काम शामिल होती हैं। इसका मतलब है कि एक सिविल इंजीनियर का कार्य हर निर्माण प्रोजेक्ट के लिए एक सा नहीं हैं।

Civil engineer work details in hindi

सिविल इंजीनियरिंग कोर्स पूरा करने के बाद निम्नलिखित पदों पे काम किया जाता है:
  • साइट इंजीनियर, 
  • डिजाईन इंजीनियर,
  • सर्वे इंजीनियर,
  • एस्टीमेटिंग इंजीनियर,
  • स्ट्रक्चरल इंजीनियर,
  • जियोटेक्निकल इंजीनियर.

कोई भी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले उसका सर्वेक्षण सर्वे इंजीनियर के द्वारा होता है फिर उस आधार पे डिजाईन और एस्टीमेट बनाया जाता है जिसे D.P.R (Detailed Project Report) कहतें है। इस काम में डिजाईन और एस्टीमेटिंग इंजीनियर शामिल होते है। इसके बाद निर्माण स्थल का काम साईट इंजिनियर की देख रेख में होता है। हर टाइप के इंजिनियर का डिटेल में काम निचे बताया गया है -

साइट इंजीनियर के काम (Construction site engineer work details)

निर्माण परियोजना (प्रोजेक्ट) के लिए साइट इंजीनियर बहुत आवश्यक है। एक साइट इंजीनियर की जिम्मेदारियां विस्तृत होती हैं क्योंकि उसे उचित प्रबंधन के लिए या कोई तकनीकी समस्या होने पर और निर्माण कार्यों की दिन-प्रतिदिन की रिपोर्ट के लिए पर्याप्त समन्वय और पर्यवेक्षण करना होता है। प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन और पूर्ण होने के लिए साइट इंजीनियर के पास कुछ बुनियादी भूमिकाएं और जिम्मेदारियां होनी चाहिए।

1. निर्माण स्थल की जिम्मेदारियाँ (Construction site duty)

साइट इंजीनियर वह व्यक्ति होता है, जो अपना अधिकांश समय अन्य प्रबंधकों या डिजाइनरों की तुलना में निर्माण स्थल पर बिताता है। साइट का दिन-प्रतिदिन प्रबंधन, जिसमें जूनियर इंजीनियर, सुपरवाइजर, ठेकेदार, उप-ठेकेदार के कार्यों का निरीक्षण और निर्देशन शामिल है। 

साइट के अन्य इंजीनियर और सुपरवाइजर को आने वाले दिन के डिजाइन और गतिविधियों के बारे में जानकारी और निर्देश देता है, जिसके आधार पर वह उन्हें साइट पर लागू करवाता है। निर्माण कंपनी के टॉप मैनेजमेंट को साइट इंजीनियर के माध्यम से साइट पर होने वाली दैनिक कार्यों के बारे में स्पष्ट तस्वीर मिलती है।


2. रिपोर्ट और अनुसूचियां तैयार करना (Work Planning & Scheduling)

साइट इंजीनियर को यह सुनिश्चित करना होता है कि साइट पे कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। साइट पर किए जाने वाले भविष्य के कार्यों की एक रिपोर्ट इंजीनियरों द्वारा दो सप्ताह पहले तैयार की जाती है। उसी के हिसाब से खरीद विभाग से संसाधन की मांग की जाती और निर्माण सामग्रियों, संसाधनों को ठेकेदारों, उप-ठेकेदारों और अन्य कर्मचारियों को आवंटित किया जाता है।

3. साइट पर गुणवत्ता नियंत्रण (Quality control at Site)

गुणवत्ता एक मापदंड है जिसे योजना के शुरुआत से अंत तक मेन्टेन किया जाना जरुरी होता है। निर्माण कार्य में किसी भी अवांछनीय गतिविधि से गुणवत्ता और धन की बहुत हानि हो सकती है। निर्माण के दौरान कोई गलती होने पर स्ट्रक्चर इंजीनियर से सलाह के आधार पर साइट इंजीनियर द्वारा सुधार किया जाता है।

साइट इंजीनियर निम्न माध्यमों से क्वालिटी कंट्रोल करता है:
  • निर्माण सामग्रियों के उपयोग से पहले जाँच करवाना।
  • यह सुनिश्चित करना कि कार्य प्रदर्शन स्पेसिफिकेशन (Design) के अनुसार हो।
  • कार्य को बिना किसी दोष और देरी के पूरा करवाना।
  • साइट पर स्वास्थ्य और सुरक्षा मामलों की देखरेख करना।


4. तकनीकी और क़ानूनी गतिविधियाँ (Technical & Legal activities)

साइट सर्वेक्षण कर ले-आउट करना जो की ड्रॉइंग के अनुसार होना चाहिए, साइट इंजीनियर के द्वारा किया जाता है। सटीकता के लिए प्लान, डिज़ाइन और क्वांटिटी की जाँच भी किया जाता है। इसके लिए निर्माण स्थल पर नियमित रूप से निगरानी की आवश्यकता होती है।

किसी भी साइट पर निर्माण कार्य शुरू होने से पहले, सभी आवश्यक परमिट केन्द्रीय या राज्य सरकारों से प्राप्त किए जाने चाहिए। साइट इंजीनियर कागजी कार्रवाई को पूरा करने के लिए स्थानीय प्राधिकरण के साथ संपर्क करते है।

उपर बताई गयी जानकारी सिविल इंजीनियर के रूप में सफल होने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर आपके पास कोई प्रश्न है, तो निचे Comment करें। 

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