Contractor Jee

A dedicated blog related to Construction

WTP और STP क्या होता है? Water Treatment Plant in Hindi

जानिये, WTP, STP और ETP प्लांट क्या है और कैसे काम करता है।

आजकल स्वच्छ जल का होना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। घरेलु कार्य के अलावे अधिकांश उद्योग अपनी प्रक्रियाओं में किसी न किसी रूप में जल का उपयोग करते हैं। एक बार जब इस पानी का उपयोग कर लिया जाता है, तो इसे निपटाने से पहले इसका शोधन (Treatment) करने की आवश्यकता होती है ताकि यह पर्यावरण पर कोई हानिकारक प्रभाव न डाले।

वाटर ट्रीटमेंट (जल शोधन), पानी में मौजूद उन सभी पदार्थों को हटाने की प्रक्रिया है, जो मानव और घरेलू उपयोग के लिए संभावित रूप से हानिकारक हैं। शुद्ध पानी वह है जो स्पष्ट और रंगहीन हो, स्वाद में सुखद, गंधहीन और शीतल हो।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) क्या है?

जल शोधन संयंत्र या डब्ल्यू.टी.पी, बड़ी मात्रा में पानी को पिने लायक बनाने के लिये बनाये जाते हैं। ये जमावट, फ्लोक्यूलेशन और कीटाणुशोधन प्रक्रियाओं पर आधारित होते हैं।

नदी, झील आदि के पानी को WTP प्लांट में शुद्ध कर शहर में सप्लाई किया जाता है, जबकि नाले और सीवेज का पानी को ट्रीट कर कृषि कार्य में उपयोग किया जाने लगा है।

WTP कितने प्रकार के होते है?

  1. वेस्ट-वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WWTP)
  2. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) 
  3. एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP)

water treatment plant kya hai

अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (WWTP)

वह पानी है जो नदी, झील आदि से मिलते है उन्हें डायरेक्ट इस्तेमाल नहीं कर सकतें है। इसमें हानिकारक तत्व मौजूद होते है, जिन्हें पानी से हटाने की जरुरत होती है। ऐसे पानी को WWTP प्लांट में शुद्ध किया जाता है।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) 

सीवेज मतलब वह पानी है जो घरेलू, चिकित्सा या परिवहन गतिविधियों में उपयोग किए जाने वाले पानी से उत्पन्न होता है। घरेलू गतिविधियों जैसे शौचालय, शावर या बेसिन/सिंक से निकलता है। ऐसे पानी ज्यादा गंदे और बदबूदार होते है जिसे Sewage Treatment Plant में शुद्ध कर कृषि कार्य या दुसरे उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP)

दूसरी ओर, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, आम तौर पर औद्योगिक अपशिष्ट जल को साफ करते हैं। इस तरह के पानी में खतरनाक केमिकल होते है जिसे बिना हटाये नदी/नाले में बहाना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। इसलिये औद्योगिक अपशिष्ट से निपटारे के लिये ETP प्लांट जरुरी होता है।

यहाँ हम, 'WTP कैसे काम करते हैं' जानेंगे।


यह कैसे काम करता है? WTP process in hindi:

Pre-Treatment: जब अपशिष्ट जल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचता है, तो यह एक फिल्टरिंग प्रक्रिया से गुजरता है जो 'प्री-ट्रीटमेंट' कहलाता है। यहां अशुद्ध जल Pre-Settling टैंक के माध्यम से बहता है, जिसमें बड़ी मात्रा में मलबा बैठ जाता है।

इसके बाद Aeretor में यह जाता है जहाँ ऑक्सीजन इसमें घुलता है। Aeration प्रक्रिया घुलनशील गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड को बाहर निकालने में मदद करती है। इससे पानी का स्वाद बेहतर होता है। 

इन सभी प्रोसेस को प्री-ट्रीटमेंट कहा गया है क्योंकि यह तीन और आक्रामक फेज- प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक ट्रीटमेंट से पहले होता है।

wtp process in hindi

Primary Treatment:

 इस चरण के दौरान, अपशिष्ट जल Flow Chanel के माध्यम से Flash Mixer से होते हुये Clariflocculator में चला जाता है। यह एक गोलाकार संरचना होता है जिसमें अपशिष्ट जल धीमी गति से बहता है। 

कार्बनिक ठोस पदार्थ यहाँ तल पर एकत्र होते हैं जबकि हल्का पदार्थ ऊपर की ओर तैरता है और आसानी से निकल जाता है।


Secondary Treatment: 

सेकेंडरी ट्रीटमेंट, प्राइमरी ट्रीटमेंट का अनुसरण करता है और इसमें बायोडिग्रेडेबल और कार्बनिक पदार्थ को हटाना शामिल होता है।

एक बार जब बड़े कीचड़ का झुंड बन जाते हैं, तो उन्हें व्यवस्थित करने की आवश्यकता होती है, और यह Sedimentation नामक प्रक्रिया में होता है। इसमें पानी को (जमावट और फ्लोक्यूलेशन के बाद) कई घंटों तक टैंक में रखा जाता है। 

जमा हुआ कीचड़ Sludge well में चला जाता है और एक अन्य प्रक्रिया को अंजाम देता है जिसे Activated Sludge Process कहा जाता है।

Note: 

  1. सामान्य रूप से Activated Sludge Process, ट्रिकलिंग फिल्टर या बायोफिल्टर और रोटेटिंग बायोलॉजिकल कांटेक्टर (RBC) का प्रावधान रहता हैं। 
  2. कभी-कभी कार्बनिक पदार्थों की हाई कंसंट्रेशन वाले नगरपालिका अपशिष्ट जल साफ़ करने के लिए श्रृंखला में इन दो प्रक्रियाओं का एक सिस्टम (उदाहरण के लिए, Sludge Process के बाद बायोफिल्टर) का उपयोग किया जाता है।


Tertiary Treatment:

 इसमें यांत्रिक और फोटोकैमिकल/क्लोरिनेशन प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। इस चरण में, अपशिष्ट जल को रेत फिल्टर के माध्यम से बहाया जाता है, जो बहुत महीन कण पदार्थ को हटा देता है। इसके बाद फोटोकैमिकल प्रक्रिया आती है, जहां पानी पराबैंगनी (यूवी) रोशनी के तहत बहता है, जो किसी भी बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने के साथ-साथ किसी भी संक्रमण को दूर करता है। 

या फिर क्लोरिनेशन द्वारा पानी को कीटाणुरहित किया जाता है। सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला कीटाणुनाशक Chlorine है। यह अपेक्षाकृत सस्ता और उपयोग में आसान होता है। जब क्लोरीन को पानी में मिलाया जाता है, तो यह सूक्ष्म जीवों सहित मौजूद किसी भी प्रदूषक के साथ प्रतिक्रिया करता है।

इस प्रकार, जब अपशिष्ट जल उपरोक्त तीन चरणों से गुजर चुका होता है, तब यह उपयोग के लिये पूरी तरह से सुरक्षित होता है।


संबंधित जानकारियाँ-

इंटीरियर डिज़ाइन करवाने में कितना पैसा खर्च लगेगा!

एक अच्छे TMT स्टील सरिया की पहचान!

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ